आजा आजा परिंदे, लौट के तू... इंतज़ार तेरा, कर रही हु मैं... क्या हर वक्त साथ, नहीं रह सकते हम... आज यहीं, सोच रही हु मैं... तु होता है कभी, कभी तेरे ख्याल... तुने ही मचाया है, मेरे दिल में बवाल... आजा अब जल्दी, ज्यादा देर ना लगा... मैं कब से तेरी राह देख रही हुँ, अकेली बैठे-बैठे यहाँ... - Pranjali Ashtikar
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