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Showing posts with the label Vaishnavi

रिश्तो का दौर

  आज हर रिश्ता, एक ही बुनियाद पर बनता है तू मुझे जितना देगा,मै उतना ही तुझे दूँगा यही कहता है  कच्चे धागो से बंधे ज्याते , सारे टूटने वाले लोग वो  सब अच्छा ही चलता है पर, दरारे आती है जब वो जैसा चाहते वैसा ना हो !  अपनो के लिये कुछ भी करलो,सवाल बस तुमने किया ही क्या है  यही आया  प्यार, मोहब्बत,माफी ये तो दिखता ही नही, भगवान मानकर जान छिड़कने का जमाना तो कब का गया !  कभी जोकर या जो हम नही वो बने,सिर्फ कुछ पल की हसी देखने के लिए  उसी बातो का घटीया मजाक बनाया, और हमे ही तनहा छोङ दिये !  वादा मतलब विश्वास होता हैं, पर अब तो इसका वादा उसको चिपकाकर शैतानी मजे लेते  भावनाओं का मूल्य अहंकार ने ले लिया, और हर दिल के साथ द्युत का खेल खेलते !  ऐसा ही चलता रहा यहा,तो प्यार तो दुनिया से मिट ही जाएगा  आने वाला भविष्य यही देखकर, अपनो से सिर्फ खुद तक का दौर लाऐगा!                      - Vaishnavi 

UDAAN ...

  उडान खुश थी मै, अपनी हि दुनिया मे  जब मुलाकात हुयी उससे तो जिने का मकसद सिखाया उसकी दुनिया ने !!  सब कुछ होकर भी खाली खाली सा लगता था मुझे  वो सारे शौक पालती थी, जिने का समय तक नही मिला था जिसे !!  शरीर का हर हिस्सा था मेरे पास, फिर भी खामिया ढुंढती थी यहा  उसका  सब धिरे धिरे मिट राहा था, फिर भी हर नजर से खुबसुरत थी वहा !!  सब थे, फिर भी अकेली थी मै, ढुंढती थी कही साथ  उसका कोई नही था, पर प्यार से थाम लेती थी हर हाथ !!  मेरे सपने थे , उडना था, पर रुक ज्याती कहकर मुश्किल है यार  देख कर उसे  लगा, मुश्किले छोटी थी उसकी जंग के सामने , फिर भी उंचा उड कर जीत ज्याती थी वो हर बार !!  आज उसने जीने और हसने का गहरा रास्ता मुझे बता दिया  और जहां छोडकर भी सबको  अपना बना लिया!!                                        -Vaishnavi

दादा राखीला घरी येना

लहानपण देगा देवा, तवा साथी भाऊराया होता  खेळता त्याच्या संग दिसं कळत नव्हता   अम्रूताचा घास घाली , माझी काहानी  ऐकता ऐकता  माझा आधार त्यो, दुसरा बापचं जसा  माझं दुखल जरास ,कि त्याचा जीव होई कसा बसा  देखना माझा भाऊ लाखात मिळणा असा  मोठा झाला अनं राखिला यायचचं  राहिला  राग नाही मला त्याचा, वाट पाहायला लावुन गेला  आमचं इटुकल घर सोडून, भारत मातेचा झाला  सीमेवर मोठ्या हिरोवानी त्यो लढतों  त्याच्या काळजी पोटी माझा जीव भांड्यात पडतो  माझी आसवे पाहुन ,चिमुकलिच्याच सपनासाठी जातो असच म्हणतो माझा भाऊ जगाचा राखींदा असा मना धीर देते   सगळ्यांचे भाऊ पाहून पार मन हे तुटते  चिठ्ठीची त्याच्या  मी दिन-रात वाट पाहते  देवा मागते , माझं सगळं पुण्य त्याला देना  त्याला सांग कि साडी-चोळी घ्यायला मला बाजारात नेना  वाट पाहून थकल्या हाताना, हात द्याया राखीला तरी घरी येना दादा राखीला तरी घरी येना                                ...

हा मै वही हु जिसे तुम औरत कहके पुकारते हो

धरती पर आयी तो खुशियां आयी पर सुकून नहीं  मुस्कान तो थी पर बोझ सा था कही  मेरे होने का एहसास तो था  पर किसी के आने की चाह भी थी ना  उम्र के साथ रिश्ते गहरे हुए,आखों में ख्वाब थे मेरे लिए  पर दुनिया की बदलती नजरोने उनके हात बांध दिए  किसी दिन नई गलियों मे छोड आए  उनके लिए महल बनाने के इरादे अधुरे रह गए नए परिवार ने अपना तो लिया  पर जन्मदाता के खिलाफ बोहोत सुना दिया ना मै यहां कि थी ना वहां की हुई  मेरे हक जताने कि कोई जगह नहीं रही  थोडा अपनापन देने बच्चों ने  दुनिया बनाई  और बडे होते हि ना किए गुन्हाओ कि सजा सुनाई  जिंदगी भर रिश्ते बदलती रही पर मेरा हक ना जमा पायी क्यो ?  सबके सपने पुरे करते करते खुद को भुलसी गयी क्यो ?  हर लिबास मे सबसे बेहतर थी,फिर भी मेरे जन्म से दुनिया रोती है क्यो ?  हा मै वही हु जिसे तुम औरत कहके पुकारते हो !  हा मै वही हु जिसे तुम औरत कहके पुकारते हो !!                                    ...

MANUSAKI NAVACH AUSHADH SAMPALAY RE...

मानुसकी नावाचं औषध संपलय रे आता।।।।