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DIL KI BAT..


दिल की बात




अक्सर रह जाते हैं अनकहे अल्फाज
आकर जुबान पर हो जाते हैं गायब आज
जहण मे ही रह जाती हैं दिल की बात 
जो कह नही पाता मै उनके साथ !!

क्यूँ हिचकिचाता हैं ये इंसान भगवान 
क्यूँ नहीं बनाया आपने उसे सामर्थ्यवान 
बेझिजक बोल देता शायद वो अपने दिल की बात
पर अटक जाती हैं गाडी उसकी वही डर के साथ !!

हिम्मत जुटाने मे बित जाती हैं सदिया 
बोल देते अगर तो कितनी हसीन लगती ये वादिया
आखिर आही जाता है वो पल 
बिछडणा या मिलना चयन करणे वाला कठीन पल !!

नियती का बनाया हैं ये सारा खेल
जो ना समझे वो कभी ना बना पायेगा मेल 
कहने से हल्का हो जायेगा बोझ दिल का तेरे
फिर ना कहना रह गई ये बात अंदर ही मेरे !!
   
    - खुशाल भोयर 

Comments

  1. That's the real thing of true love👏👍

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