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BHEDIYA ..


भेडिया



मासुमियत का पर्दा लिये घुम रहे भेडिये यहाँ,
कमजोर और गरिबो का चुस रहे वो खून यहाँ , 
रोक न पाएगा इन्हें कोई, 
है बब्बर शेर उनके पिछे खडा, 
जंगल के इस जानवर को ही कभी चुना गया था राजा, 
बदकिस्मती कमजोरो की, इन्होनेही डाले थे वोट वहां ...

रिश्वत का सहारा लिये करते है वो राज यहाँ ,
जब ना चलती लक्ष्मी तो चलता हैं धमकाना यहाँ,
रोक न पायेगा इन्हे कोई,
है अपने देश का कानून ही अंधा,
बिकाऊ है आज चंद पैसो के लिये अधिकारी भी यहाँ ..
बदकिस्मती आम जनता की, ये भी डालते है ऊन्ही के जेब मे पैसा .. 

कुर्सी पर बैठकर दिखलाते है ये अपना अधिकार,
भुलाकर सारी घोषणाये सिर्फ चलता है हुकूमत का फंडा, 
अपना पराया कोई भी नहीं इनके लिए यहाँ,
सत्ता का मोह भुला देता है इनको हर आपसी रिश्ता,
जंगल के ये भेडीये नोचकर खाने है तैयार हमेशा ,
लेते फिरते है हर तरसाये इंसान से बत्तर मौत की बद्दुआ !! 

खुशाल भोयर 




Comments

  1. U r vocabulary with perfect word bro....Great lines Khushal
    ❤️🙌🙌

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  2. Nicely explained reality...👏👏👏

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  3. ❤️❤️❤️❤️❤️

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  4. Very well expressed👏ise kehte hai kalam ki takat✌

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    1. Sahi kaha Mrunali ... Pen is mightier than sword !
      Thank you for your encouragement 😊🍀💓

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  5. Really great work bhai.... 👍👏👏 Keep growing.....

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