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MAKARSANKRANTI

 

मकरसंक्रांती


नये साल का पहला गान 

आसमान में पतंगों की उड़ान 

भानु को मकरप्रवेश का मान 

खलियानों की नयी फसल का सम्मान ।।


तिल की खुशबू, गुड की मिठास 

घर - घर रहता लड्डू की खुशबू का सहवास 

हल्दी कुंकु का स्नेह निमंत्रण 

सप्ताहों तक भेटवस्तुओ का वितरण ।।


हर्ष ,उमंग, नई सोच और परस्पर दुल्हार 

एक दूसरे से मीठे बोलने की पुकार 

आपस की शत्रुता भुलाकर 

मैत्री करने की प्यार भरी पुकार  ।।


पेच की रस्सी - खेच का उल्हास 

अंबर गायब होने का आभास 

सभी तरफ ऐसे मनाए जाने वाला 

मकरसंक्रांती का प्यार भरा त्योहार ।। 


- खुशाल भोयर

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