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दास्तान


 दास्तान


पढ़कर जीत की रहस्यमय दास्तान

सारी मुश्किलें बन गई आसान

गुम हो जाता था भीड़ में कभी जो

नजरो के सामने ही रहता आज वो ।।


सीखा रहा जीने का तरीका जो

बदल डाली उसने आदतें सारी बरबादी की वो 

आसमान से दोस्ती करने का जुनून भी आया 

खुद पर भरोसा करके मैंने सबकुछ पाया ।।


सार्थक बन गया वो मेरा विश्वास 

खुद पर समय बिताने का अट्टहास 

धार लग गई मेरे तरवार पर 

अब तो हर वार होगा जोरकर ।।


- खुशाल भोयर


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