ना जाने क्यूँ...
आज ना जाने क्यूँ,
बड़ी उलझन हो रही है...
पढ़ते-पढ़ते मुझे हर बार,
क्यूँ नींद आ रही है...
आँखों पे पानी मारा,
कुछ कदम चल के आया...
पर इन नैनों को,
आज कुछ ना भाया...
आगे बढ़ने का सपना दिखाया,
ढेर सारी चीजों का मोह भी आजमाया...
पर फिर से किताब हाथों में लेने पर,
नींद ने पकड ही लिया मुझे जकड कर...
-Pranjali Ashtikar

Ohh ...yr ye to mere sath bhi hota hai 😂😂
ReplyDeleteNice poem 😊👌
Ooh.. 😂😂😂 Matlab ab Tu bhi padhta h.. 🤪🤪🤟🤟🤟
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