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एक तरफा हिस्सा,

 


कुछ बाते अधूरी थी,कुछ यादे अधूरी थी । 

कूछ रिश्ते अधूरे थे, कुछ मुलाकाते अधूरी थी। 

कुछ ख्वाब सिर्फ मेरे थे, मोहब्बत की दुनिया मे भी मैं अकेली थी, 

मेरा राजकुमार मेरा ही सपना था, और कहानियाँ भी मैंने ही लिखी थी। 

वो मुझे बस एक राही मानता था, और मै उसे खुदा मान बैठी थी। 

उसे कुछ पल मेरे साथ चलना था, और मै जन्मो के रास्ते ढूंढने लगी थी। 

 उसने मुझमे कभी झाका ही नही, नही तो समझ ज्याता हमेशा मेरी आंखें प्यार का इझहार करती थी 

वो किसी और को मान बैठा था, और उसकी मुस्कुराहट मै मेरे लिये ही समझ ती थी। 

उसकी हर झलक के लिये मेरा दिल तरसता था, और उसे कोई खबर तक नही हुई थी। 

 बिना उससे पूछे उसे अपना हिस्सा मान लिया था, और फिर मेरी बरबादी की वजह मेरी गलतीया ही बनी थी। 

वो तो कुछ बिना सुने समझे ही दूर चला गया था, मेरे खयालो ने फिर भी उसकी परछाई तक संभाल के रखी थी। 

खूबसूरत था सब कुछ क्योँकी जो भी था एक तरफा था, और इश्क़ की हसीन दास्ता भी एक तरफा ही थी!!

                                      - Vaishnavi Napte

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